'जीवन का स्वभाव'
# जीवन क्या हैं? जीवन हमारा बनाया हुआ नहीं हैं। जीवन परमात्मा ने बनाया हैंं और परमात्मा ने जीवन का स्वभाव बनाया हैं,वह हैं आनंद। जीवन दुःख के लिए परमात्मा ने नहीं बनाया हैं।इंसान अपने मूल स्वभाव के अनुरूप नहीं चलता तभी जीवन हमें दुःखों से ,कठिनाइयों से भरा एहसास होने लगता हैं।यदि इंसान अपने मूल स्वभाव के अनुरूप चलें तो वह हमेशा आनंदित रहेगा। आप कहेंगे कि यह कौन-सा विषय हो गया हैं।यह तो सभी जानते हैं और सब इसके लिए प्रयास भी करते हैं।यह तो कहने की बात हो गई, लेकिन हम चारों तरफ निगाह करें, तो दिखाई देगा कि हर कोई दुःखों को खोज रहा हैं।उसके सारे कृत्य ऐसे हो रहे हैं, जो दुःखों को बढ़ावा दे रहे हैं। इसीलिए ऊपरी तौर पर सब जानते है कि जीवन का स्वभाव आनंद हैं, पर भीतर स्मृति में यह बात लगातार रहती नहीं हैं।यहाँ तक कि लोग आनंद को पाप तक बताते हैं।उन्होंने दुःख को ही जीवन का सत्य समझ लिया हैं।वे लोगों को कष्ट उठाने की शिक्षा और प्रेरणा देते हैं।कहते हैं कि इस जन्म में जितना ज्यादा कष्ट उठाओगे, ...